अक्षरसमाम्नाय:

अथ सँज्ञाप्रकरणम्

नत्वा सरस्वतीं देवीं शुद्धां गुण्यां करोम्यहम् |

पाणिनीयप्रवेशाय लघुसिद्धांतकौमुदीम् ||

 

 अक्षरसमाम्नाय:, शिवसूत्राणि

अ इ उण्

ऋ लृक्

ए ओंङ्

ऐ औच्

ह य व रट्

लण्

ञ म ङ ण नम्

झ भञ्

घ ढ धष्

ज ब ग ड दश्

ख फ छ ठ थ च ट तव्

कपय्

श ष सर्

हल्

इति माहेश्वराणि सूत्राणि अणादिसंज्ञार्थानि। एषामन्त्या इत:। हकारादिषु अकार: उच्चारणार्थ:। लण्मध्ये तु इत्संज्ञक:|

महेश्वर-प्रसादलब्धानीत्यर्थ:। तथा चोक्तम्

नृत्तावसाने नटराजराजो ननाद ढक्कां नवपञ्चवारम् ।

उद्धर्तुकाम: सनकादिसिद्धान्   एतद्विमर्शे शिवसूत्रजालम् ॥

11 Responses to अक्षरसमाम्नाय:

  1. Himanshu Pota says:

    सूत्राणि तु सूत्राणि एव सन्ति| तेषां विस्तारं कृत्वा यथा वयं बोधितुं शक्नोमि तथा लिखतु|

    भवतः प्रयासः प्रशंसनीयः अस्ति|कृपया भवति वृतपत्रस्य वर्धनं करोतु|

    धन्यवादः|

    हिमांशुः|

  2. Himanshu Pota says:

    भवतः वृत्तपत्रस्य इति भवितुम् अर्हति|

  3. srinilakshmi says:

    प्रिय हिमांशु महोदयः,
    धन्योऽस्मि। वृत्तिरेव सूत्रं स्पष्टीकरोति । अतः निम्नलिखिताः ग्रंथाः पठनीयाः।
    1. http://www.mlbd.com/msubjdisp.asp?subname=GRAMMAR&Page=4&nxtPage=1
    लघुसिद्धांतकौमुदी: पाणिनीयव्याकरणप्रवेशिका
    लेखक: – पण्डित श्रीविश्वनाथशास्त्री प्रभाकरः
    प्रिंसिपल श्रीसरस्वती संस्कृत कॅलेज, खन्ना, पंजाब
    परिशिष्टकारः – कविकान्तः श्रीनिगमानन्दशास्त्री
    सूत्रभाषा अनुवादकारः – श्रीलक्ष्मीनारायणशास्त्री
    428 पृष्ठ
    मूल्य: रु. 44
    प्रकाशकः – मोतीलालबनारसीदास, नयी दिल्ली
    2. अष्टाध्यायी भाष्य प्रथमावृत्ति
    लेखकः – पदवाक्यप्रमाणज्ञ श्री पं ब्रह्मदत्तजी जिज्ञासु
    संशोधकः – युधिष्ठिर मीमांसक
    प्रकाशकः – प्यारेलाल कपूर
    श्री रामलाल कपूर ट्रस्ट, अमृतसर
    3 भाग, ~1500 पृष्ठ
    भवतः सेवकः,
    श्रीनिवासकृष्णः

  4. afloo says:

    श्रीनिवासजी ,
    अनहदनाद पर आपकी लिपि सम्बन्धी टिप्पणी देख कर यहाँ आ पहुँचा । अच्छा लगा ।

  5. The damaru sound of lord shiva as the great maheswarani sutrani ,the very structure of the divine language is efficiently brought out by you and it is learner friendly.This attempt of bringing our traditional classroom learning to interactive learning is always a welcoming state.
    Let this be a sucessfull venture!!

  6. jyotiraditya says:

    good work

  7. Dr NP Mishra says:

    Amaru sound of lord Shiva is not now limited to certain shrines but disseminating in the universe. ” Akshar ” is now on net with friendly & interactive learning’s. We prey to the lord Shiva bless on the holy ” Diwali ” to every admirer of ” Sanskrit Learners”.

  8. vasya10 says:

    This is a great site! For a samskrita student like me, this is enormously helpful. Please continue your good work.

  9. Uma says:

    Excellent work. Very helpful. Wonder why no further posts?

  10. नीलेश धनाणी , गुजरात says:

    ॐ ॥ आपका अत्यंत आभारी हूँ । आपके इस प्रयास के लिए आपको साधुवाद ।
    नीलेश धनाणी , गुजरात

  11. Sridhar says:

    excellent. I am not exactly a beginner but i have been out of touch with this divine language.
    How do i scroll the lessons? Is there an order to scroll for late comers?

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